Monday 7 January 2013

सवेरा


"अश्रु भरे इन आँखों में, मुस्कानों का डेरा जाने कब होगा,

उम्मीदों के घोंसले में, खुशियों का बसेरा जाने कब होगा,

उजालों की ये किरणें तो रोज छिटक आती हैं कमरों में,

पर इस घर में, मेरी जिंदगी में, सवेरा जाने कब होगा !"

चक्रव्यूह


"समझौते तो कर लिए जिंदगी से, खुशी की आस छोड़ न सका,

रिश्ते बस यूँ ही जुड़ गये, पर उनको बुनियाद से जोड़ न सका,

औरों को रस्ता बतला देना तो बहुत ही आसान होता है 'दीपक',

खुद अपनी जिंदगी के चक्रव्यूह का भेद आज तक तोड़ न सका!"