"है नयी सुबह, है नए दिन की नयी शुरुआत,
कल मन व्याकुल था, आज आहत है दिल भी,
हे तिमिरारी, दूर करो मेरे ये स्याह हालात !"
उम्मीद है दिल में, शायद हो कुछ नयी बात,
कल मन व्याकुल था, आज आहत है दिल भी,
हे तिमिरारी, दूर करो मेरे ये स्याह हालात !"
मन के अन्दर जब कुछ ऐसे विचार भाव आते हैं जो कि कलम को उद्वेलित करते हैं कि उनको कविता, छंद, मुक्तक या यूँ ही एक माला में पिरो दूँ !! कुछ ऐसे ही विचारों का संग्रह किया है यहाँ पर !
चाय पीने के भी कुछ उसूल होते हैं, ये हर किसी को कहाँ माकूल होते हैं। चाय हो, संग तन्हाई हो, या कोई हमदम हो, ऐसे चंद लम्हे ज़िंदगी में बेहद म...