"है नयी सुबह, है नए दिन की नयी शुरुआत,
कल मन व्याकुल था, आज आहत है दिल भी,
हे तिमिरारी, दूर करो मेरे ये स्याह हालात !"
उम्मीद है दिल में, शायद हो कुछ नयी बात,
कल मन व्याकुल था, आज आहत है दिल भी,
हे तिमिरारी, दूर करो मेरे ये स्याह हालात !"
मन के अन्दर जब कुछ ऐसे विचार भाव आते हैं जो कि कलम को उद्वेलित करते हैं कि उनको कविता, छंद, मुक्तक या यूँ ही एक माला में पिरो दूँ !! कुछ ऐसे ही विचारों का संग्रह किया है यहाँ पर !
जिनके लहू की हर बूँद से, भारत स्वर्णिम परिवेश हुआ, नमन माटी के उन सपूतों को, जिनसे रोशन देश हुआ। १ जिनने हँसकर प्राण दिए थे, माँ की लाज बचान...