Saturday, February 16, 2013

तकदीर

जिनके रंग से खिलती थी मुस्कानें जहाँ की,
उन्ही आँखों में सूख गयीं सारी आशाएँ अब।
कैसे बताएँ जमाने को वजह अपने गम की,
खुद को ही ना मालूम अपने उदासी का सबब।।


जिंदगी जो कभी हुआ करती थी सुनहरी सुबह,
आज वही ठहर कर धूमिल सांझ हो गयी है।
खुशियों के आगमन की उम्मीद ही है बेमानी
इस माने में अब तकदीर ही बांझ हो गयी है।।

कभी हम भी जिया करते थे अपनी शर्तों पर,
भरोसा था तो दिल को बस तदबीरों में।
जिंदगी ने पाठ कुछ यूँ पढाये हैं 'दीपक'
हंसी ढूंढता हूँ मैं अब हाथ की लकीरों में।।

Monday, January 7, 2013

सवेरा


"अश्रु भरे इन आँखों में, मुस्कानों का डेरा जाने कब होगा,

उम्मीदों के घोंसले में, खुशियों का बसेरा जाने कब होगा,

उजालों की ये किरणें तो रोज छिटक आती हैं कमरों में,

पर इस घर में, मेरी जिंदगी में, सवेरा जाने कब होगा !"

चक्रव्यूह


"समझौते तो कर लिए जिंदगी से,
खुशी की आस छोड़ न सका,

रिश्ते बस यूँ ही जुड़ गये, 
पर उनको बुनियाद से जोड़ न सका,

औरों को रस्ता बतला देना तो 
बहुत ही आसान होता है 'दीपक',

खुद अपनी जिंदगी के चक्रव्यूह 
का भेद आज तक तोड़ न सका!"

Monday, April 9, 2012

सुबह

"है नयी सुबह, है नए दिन की नयी शुरुआत,

उम्मीद है दिल में, शायद हो कुछ नयी बात,

कल मन व्याकुल था, आज आहत है दिल भी,

हे तिमिरारी, दूर करो मेरे ये स्याह हालात !"

जिंदगी

समझा जिंदगी होती है समझौतों का खेल,

माना जिंदगी होती है रिश्तों का तालमेल,

हमने तो तालमेल की समझौतों से, फिर क्यूँ,

जाना जिंदगी होती है बस एक अंतहीन जेल.


उदास

 "पता नहीं मुझे भी क्यूँ मन मेरा उदास है,

लोग शायद ये सोच रहे कि हुआ ये देवदास है,

खुदा ने किस्मत नजर कि थी मेरी जिंदगी को

जिंदगी ग़मगीन है, किस्मत नहीं मेरे पास है"

याद

तमाम उम्र जलते रहे हम बस उनकी ही याद में,

उन्होंने हमारा नाम तक ना लिया अपनी फरयाद में.

कुछ नहीं

बे-तलब तुम कहते कुछ नही बा-अदब हम कहते 'कुछ नहीं'!  आंखों में किताब है पूरी लब क्यूं कहते कुछ नहीं? बातों का मौसम भी हो तब क्यूं कहत...