ज़िंदगी है तो दर्द भी है
चैन-ओ-आराम नहीं है,
पर प्यारी सुबहा भी है
सिर्फ ग़म की शाम नहीं है,
इसलिये मुस्कुराओ और
मुस्कानें बिखेरते रहो
क्यूंकि होठों से दूसरा
बेहतरीन काम यही है!
मन के अन्दर जब कुछ ऐसे विचार भाव आते हैं जो कि कलम को उद्वेलित करते हैं कि उनको कविता, छंद, मुक्तक या यूँ ही एक माला में पिरो दूँ !! कुछ ऐसे ही विचारों का संग्रह किया है यहाँ पर !
जिनके लहू की हर बूँद से, भारत स्वर्णिम परिवेश हुआ, नमन माटी के उन सपूतों को, जिनसे रोशन देश हुआ। १ जिनने हँसकर प्राण दिए थे, माँ की लाज बचान...
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