मेरे मौला सुन ले तू ताकीद मेरी एक और,
आस ही रह गयी खुशियों की दीद मेरी एक और,
मेरे ग़म आये गले मिलने को तन्हाई में मुझसे
कुछ इस तरह गुजर गयी ईद मेरी एक और !!
मन के अन्दर जब कुछ ऐसे विचार भाव आते हैं जो कि कलम को उद्वेलित करते हैं कि उनको कविता, छंद, मुक्तक या यूँ ही एक माला में पिरो दूँ !! कुछ ऐसे ही विचारों का संग्रह किया है यहाँ पर !
जिनके लहू की हर बूँद से, भारत स्वर्णिम परिवेश हुआ, नमन माटी के उन सपूतों को, जिनसे रोशन देश हुआ। १ जिनने हँसकर प्राण दिए थे, माँ की लाज बचान...