आँखो में आयी दिल की वो बात,
काश तुम कभी तो समझ पाते.
तुझे देखते ही मेरे दिल का खिल जाना,
इतनी खुशी मानो जन्नत ही मिल जाना.
बिछूड़ते वक़्त वो मायूस से दूर खड़े हम,
रोम-रोम से टपकता वो विदाई का गम.
पागल दिल के वो बेकरार हालात,
काश तुम कभी तो समझ पाते.
परंपराओं के खिलाफ वो विद्रोही तेवर,
पर मौन मेरे होठों के कीमती जेवर.
दिल की बात जान को ही ना कह पाना,
कहते कहते बस यूँ ही चुप रह जाना.
मेरा जीवन हर साँस तेरी ही सौगात,
काश तुम कभी तो समझ पाते.
तेरी हर खुशी में मेरी आँखो की हँसी बेपर्द,
तेरी हर मायूसी में नम मेरे दिल के वो दर्द.
सदियों तक राह तकने को मेरी आँखे तैयार,
बेचैन दिल को बस तेरी आस तेरा ही इंतजार.
मेरे धड़कन के वो तड़पते ज़ज्बात,
काश तुम कभी तो समझ पाते.
मन के अन्दर जब कुछ ऐसे विचार भाव आते हैं जो कि कलम को उद्वेलित करते हैं कि उनको कविता, छंद, मुक्तक या यूँ ही एक माला में पिरो दूँ !! कुछ ऐसे ही विचारों का संग्रह किया है यहाँ पर !
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अति सुन्दर. पढ़कर अच्छा लगा.जब आँखों में दिल कि बात आती है तो यह जरूर लगता है कि इस तीव्र मौन अभिवयक्ति को कोई समझ पाता.
ReplyDeleteDhanyavaad bhai.
ReplyDeleteअंर्तमुखी व्यक्ति यूं ही सोचता है,पर समझने के लिए भी नही क्ह पता।
ReplyDeleteजी... और कवितायें ही अभिव्यक्ति का जरिया बन जाती हैं.. आप जैसे सुधी स्नेही अभिभावकों का आशीर्वाद बना रहे 🙏
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