"अश्रु भरे इन आँखों में, मुस्कानों का डेरा जाने कब होगा,
उम्मीदों के घोंसले में, खुशियों का बसेरा जाने कब होगा,
उजालों की ये किरणें तो रोज छिटक आती हैं कमरों में,
पर इस घर में, मेरी जिंदगी में, सवेरा जाने कब होगा !"
मन के अन्दर जब कुछ ऐसे विचार भाव आते हैं जो कि कलम को उद्वेलित करते हैं कि उनको कविता, छंद, मुक्तक या यूँ ही एक माला में पिरो दूँ !! कुछ ऐसे ही विचारों का संग्रह किया है यहाँ पर !
चाय अब भी शायद आग पर वैसे ही उबलती होगी और यादें पके आते थे, वो मेज़ अब भी वहीं होगी, जहाँ चाय के साथ कुछ ख़्वाब रखे जाते थे। कभी कॉफ़ी के...
Nice one
ReplyDeleteThanx
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