Wednesday, August 17, 2022

दिल उड़ने चला है

तेरी आंखों के रंग पढ़ के

मधुर अनुराग में पड़ के

कुछ ख्वाब सुहाने गढ़ के

फिर दिल उड़ने चला है !


मन की उमंगें जान कर

तुम को अपना मान कर

इस रिश्ते को पहचान कर

आज दिल उड़ने चला है !


कोई अपना जब भी रुठा था

एक साथी भी कहीं छूटा था

मासूम ये रोया था, टूटा था

वही दिल उड़ने चला है !


न ऊंचाई का कोई ज्ञान है

न हवाओं के रुख का भान है

ज़रा सोचो कितना नादान है

फिर भी दिल उड़ने चला है !


हौसले भी तो तेरे झुके से थे

तरंगें भी तो कब से रुके से थे

कदम भी तो कितने थके से थे

करामात कि दिल उड़ने चला है !


ग़म के बादल यूं भागे हैं

अरमां कुछ क्यूं जागे हैं

न जाने अब क्या आगे है

जब दिल उड़ने चला है !

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