Saturday, August 20, 2022

यकीन कर

सितारे उतर आयेंगें तेरे लिये ज़मीन पर

अंधेरों की फिक्र में न दिल ग़मगीन कर !


ऊपर वाले पे भरोसा नहीं तो ना सही

एक बार ज़रा ख़ुद पर तो यकीन कर !


भटक आया करो तुम मेरे ख्वाबों में

कभी यूं मेरी रात को भी हसीन कर !


खुशियां छलकेगी तुम्हारे भी होठों पर

बस किसी की आँख मत नमकीन कर !


आँखें जो चुरा लेते हो निगाह मिलते ही

मेरे बेगुनाह नज़रों की न यूं तौहीन कर !


हसरतों में रंग भरना तो आसां है दोस्त

बात तो तब हो जो नक़्शे क़दम रंगीन कर !


चाहत-ए-दिल ना मिले तो अफसोस क्यूं

कभी ख़ुदा की नेमत पर भी तस्क़ीन कर !


माना खुशियों की जेब खाली है आज तेरी

दिल को तू ना अपने ज़रा भी मिस्कीन कर !


अपने घर से ही बेगाना हो जायेगा देख

खुद को न यूं तू औरों में तल्लीन कर !


सारी दौलत तेरे सारे ख़ज़ाने बेमानी होंगे

तू अपनी औलाद को गर न ज़हीन कर !


ख़िरद-मंदी के किरदार में थक गया है दिल

चल आ अब कोई नादानी ताज़ातरीन कर !


इश्क़ है तो बस लफ़्ज़ों से ना ज़ाहिर कर

बांहों में भर उसे और फिर मुतमईन कर !

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