Thursday, October 29, 2026

चाय पीने के भी कुछ उसूल होते हैं

चाय पीने के भी

कुछ उसूल होते हैं,

ये हर किसी को

कहाँ माकूल होते हैं।

चाय हो, संग तन्हाई हो,

या कोई हमदम हो,

ऐसे चंद लम्हे ज़िंदगी में

बेहद मक़बूल होते हैं।


प्याली में चाय

और निगाहों में एहतराम हो,

बातों में नर्मी और

लहज़े में सलाम हो,

चाय का मज़ा तो

तब दोगुना हो जाता है,

जब सामने बैठा शख़्स

कोई हम-ख़िराम हो! 


न चुस्कियों में जल्दबाज़ी,

न बातों में शोर हो,

हर घूँट में सुकून

और हर लफ़्ज़ में नूर हो,

चाय की महफ़िल में

बस इतनी-सी शर्त है,

दिल में अदब हो

और रिश्तों में सुरूर हो।


न दौलत का तकब्बुर,

न शोहरत का गुमान हो,

दो प्यालियाँ चाय की हों

और दिलों में सम्मान हो!

न लफ़्ज़ों में बनावट,

न बातों में अभिमान हो,

चुस्कियों में सुकून मिले,

हर घूंट मेहरबान हो।


न किसी को बहकाना,

न ख़ुद को भुलाना,

न झूठी क़समों से

किसी को आज़माना,

चाय सिखाती है अदब से

रिश्ते निभाने का हुनर,

कि पहले ख़ुद मुस्कुराना,

फिर किसी को हँसाना।


कभी सहर के सन्नाटे में

लबों पर चाय ताज़ी सी, 

पसरी हो तन्हाई पर

संग याद-ए-माज़ी की, 

अनुराग के ये पल

ईश्वर को कबूल होते हैं

अकेले चाय पीने के भी

कुछ उसूल होते हैं। 


शराब की महफ़िल में

जामों के दौर चलते हैं,

कहीं ज़िक्र पुराने ग़मों का,

कहीं टूटे दिल मचलते हैं,

मगर चाय की प्याली में

अजब-सा एहतिराम है,

जहाँ कदम लड़खड़ाते नहीं

बल्कि टूटे दिल संभलते हैं।


जाम उठाने के भी

अपने दस्तूर हैं, 

मयखाने के हिस्से

किस्से भरपूर हैं, 

पर चाय की चुस्की

हो तेज़ या बेआवाज़, 

छुपा रखें हैं इसने

जाने कितने राज़।

जब अदरक इलायची

दूध संग चाय में घुलते हैं, 

दिलों के दर्द भी तब

बेसाख्ता खुलते हैं। 


हाथों में चाय

और दिलों में सुकून

ऐसे लम्हों में हम

हर किसी के साथ

कहाँ मशगूल होते हैं, 

हाँ जी हूज़ूर

चाय पीने के भी

कुछ उसूल होते हैं।

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चाय पीने के भी कुछ उसूल होते हैं

चाय पीने के भी कुछ उसूल होते हैं, ये हर किसी को कहाँ माकूल होते हैं। चाय हो, संग तन्हाई हो, या कोई हमदम हो, ऐसे चंद लम्हे ज़िंदगी में बेहद म...