लब खामोश तो पलकें न झुका
आंखें बोले कमाल इन्हें कहने दे
ये आंसू होते हैं वजनदार पानी
मत रख संभाल, इन्हें बहने दे,
लोग कहते तो हैं कि खुश रहो
मगर मजाल कि हमें रहने दें !
मन के अन्दर जब कुछ ऐसे विचार भाव आते हैं जो कि कलम को उद्वेलित करते हैं कि उनको कविता, छंद, मुक्तक या यूँ ही एक माला में पिरो दूँ !! कुछ ऐसे ही विचारों का संग्रह किया है यहाँ पर !
जो पास था, उसकी क़दर तो रोज़ ही कमती रही जो नहीं मिला, उसी की चाहत में उम्र ढलती रही। जिसे पाने की दुआ में जाने कितनी रातें काट दीं, वो मिल...
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