हंसते मुखड़ों पर बह जाओ न ज़ज्बात में
ज़िंदगी उलझी पड़ी है सबके ही हालात में
मुस्कुराके टाल देते दिन में हम यूंही जिन्हें
घेर लेते हैं चौतरफा वो दर्द आकर रात में
मन के अन्दर जब कुछ ऐसे विचार भाव आते हैं जो कि कलम को उद्वेलित करते हैं कि उनको कविता, छंद, मुक्तक या यूँ ही एक माला में पिरो दूँ !! कुछ ऐसे ही विचारों का संग्रह किया है यहाँ पर !
चाय पीने के भी कुछ उसूल होते हैं, ये हर किसी को कहाँ माकूल होते हैं। चाय हो, संग तन्हाई हो, या कोई हमदम हो, ऐसे चंद लम्हे ज़िंदगी में बेहद म...
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