Sunday 26 September 2010

कभी तो समझ पाते

आँखो में आयी दिल की वो बात,
काश तुम कभी तो समझ पाते.

तुझे देखते ही मेरे दिल का खिल जाना,
इतनी खुशी मानो जन्नत ही मिल जाना.

बिछूड़ते वक़्त वो मायूस से दूर खड़े हम,
रोम-रोम से टपकता वो विदाई का गम.

पागल दिल के वो बेकरार हालात,
काश तुम कभी तो समझ पाते.


परंपराओं के खिलाफ वो विद्रोही तेवर,
पर मौन मेरे होठों के कीमती जेवर.

दिल की बात जान को ही ना कह पाना,
कहते कहते बस यूँ ही चुप रह जाना.

मेरा जीवन हर साँस तेरी ही सौगात,
काश तुम कभी तो समझ पाते.


तेरी हर खुशी में मेरी आँखो की हँसी बेपर्द,
तेरी हर मायूसी में नम मेरे दिल के वो दर्द.

सदियों तक राह तकने को मेरी आँखे तैयार,
बेचैन दिल को बस तेरी आस तेरा ही इंतजार.

मेरे धड़कन के वो तड़पते ज़ज्बात,
काश तुम कभी तो समझ पाते.

2 comments:

  1. अति सुन्दर. पढ़कर अच्छा लगा.जब आँखों में दिल कि बात आती है तो यह जरूर लगता है कि इस तीव्र मौन अभिवयक्ति को कोई समझ पाता.

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