मन के अन्दर जब कुछ ऐसे विचार भाव आते हैं जो कि कलम को उद्वेलित करते हैं कि उनको कविता, छंद, मुक्तक या यूँ ही एक माला में पिरो दूँ !! कुछ ऐसे ही विचारों का संग्रह किया है यहाँ पर !
Monday, August 15, 2011
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कुछ नहीं
बे-तलब तुम कहते कुछ नही बा-अदब हम कहते 'कुछ नहीं'! आंखों में किताब है पूरी लब क्यूं कहते कुछ नहीं? बातों का मौसम भी हो तब क्यूं कहत...
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"This year's independence day celebration is sponsored by BIG BAZAAR - Is se sasta aur Achcha kahee nahin milenga"......the l...
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रिटायरमेंट है अगर एक पारी का अंत तो है एक नई इनिंग की शुरुआत भी, है मंजिल पर पहुंचने का सुखद अहसास तो है कुछ नातों से बिछड़ने की बात भी. याद...
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मेरे मित्र भाई बनवारी लाल, हरदम रहते हैं बड़े बेहाल चेहरे पे परेशानी हरपल हैरान, बहुत कम दिखती उनके होठों पे मुस्कान सारांश में आप समझ ...
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