Thursday 14 October 2010

वो भला कब दूर होता है

रिश्तों का दिखावा करते जो, उन्हें ही सालता अकेलापन,
नहीं तो जो दिल में रहता है, वो भला कब दूर होता है.

जो मर्ज देता है ज़ालिम, वही है उसका हकीम भी,
बड़ा अजीब भी ये दिल के रोग का दस्तूर होता है.

बेकरार मन को भला कब रहता है किसी भी क़ानून का डर,
बंदिशें सारी नाकाम रहती, जब कोई दिल से मजबूर होता है.

वो शाख जो लदी हो फलों से, झुकी रहती है हमेशा,
जो पूरा ज्ञानी होता है वो नहीं कभी मगरूर होता है.

जिंदगी मे किसी के भी वक़्त सदा एक जैसा नही रहता,
रात कितनी भी अंधियारी हो, सुबह उजाला ज़रूर होता है.

किस्मत से ज़्यादा और समय से पहले कुछ नहीं मिलता,
यह बहाना उनका है जिन्हें तक़दीर का लिखा मंजूर होता है.

लगन और मेहनत की कोई कमी नहीं है इस जहाँ में,
अमर वो होते हैं जिनमें नया करने का फितूर होता है.

बदल रहा है देखो आज इंसाफ़ का मंज़र 'दीपक',
गुनहगार मौज करते हैं, परेशान बेकसूर होता है.

8 comments:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति .

    श्री दुर्गाष्टमी की बधाई !!!

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  2. Dhanyavaad Ashok sir.

    aapko bhi Vijayadashmi aur durga puja ki shubhkamnayen.

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  3. bahut achchhe deepak bhai... behad kareene se sajaaya hai jajbaat ko... badhayi...

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  4. अच्छी प्रस्तुति के लिए साधुवाद

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  5. वो शाख जो लदी हो फलों से, झुकी रहती है हमेशा,
    जो पूरा ज्ञानी होता है वो नहीं कभी मगरूर होता है.
    sundar!

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  6. Kya baat h sir, itni sundar rachna, ek ek shabd me sacchai hai

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  7. बहुत बहुत धन्यवाद.

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