लब खामोश तो पलकें न झुका
आंखें बोले कमाल इन्हें कहने दे
ये आंसू होते हैं वजनदार पानी
मत रख संभाल, इन्हें बहने दे,
लोग कहते तो हैं कि खुश रहो
मगर मजाल कि हमें रहने दें !
मन के अन्दर जब कुछ ऐसे विचार भाव आते हैं जो कि कलम को उद्वेलित करते हैं कि उनको कविता, छंद, मुक्तक या यूँ ही एक माला में पिरो दूँ !! कुछ ऐसे ही विचारों का संग्रह किया है यहाँ पर !
आसमान में भी एक चाँद है, मेरे सिर पर भी एक चमकता, वह रात को निकलता है साहब, मेरा वाला पूरे दिन दमकता। वह बादलों से आँख-मिचौनी खेले, मैं टोपी...
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